गोरखपुर का गोरक्षनाथ पीठ व आदित्यनाथ योगी का एक परिचय


गोरखपुर के गोरक्षनाथ पीठ एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्य नाथ योगी का गहरा संबंध है आइए कुछ जानें
गोरक्षपीठ गोरखपुर ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी के समय से नाथ संप्रदाय एवं साधना के साथ ही हिंदुत्व के प्रचार-प्रसार का मुख्य केंद्र रहा है। गोरक्षनाथ पीठ के महंत अवेधनाथ जी अपनी बढ़ती उम्र और अस्वस्थता के चलते, उन्हें एक सद शिष्य की तलाश थी, जो इस पीठ की परंपराओं का सही तरीके से निर्वहन कर सके। अंतत: यह तलाश आदित्यनाथ जी पर जाकर पूर्ण हुई। श्री आदित्यनाथ जी को संवत् 2050 बसंत पंचमी तदनुसार 15 फरवरी 1994 पर गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेधनाथ जी द्वारा मांगलिक वैदिक रीति-रिवाज से अपने उत्तराधिकारी पट्ट शिष्य आदित्यनाथ जी का दीक्षा अभिषेक संपन्न हुआ।
आदित्यनाथ जी का एक परिचय- आपका जन्म देवभूमि पौड़ी गढ़वाल के पंचुर नामक ग्राम में 5 जून 1972 को हुआ। आपको माता-पिता ने अजय प्रताप सिंह नाम दिया। विज्ञान विषय में स्नातक योगी आदित्यनाथ जी के कार्य व्यक्तित्व से भारत वर्ष एवं पूरे विश्व में जहां-जहां भी हिंदू रहते हैं परिचित हैं एवं उनकी कार्यकुशलता, कर्मठता, निष्ठा से भलीभांति परिचित हैं। योगी जी जैसे तेजस्वी, ऊर्जावान तथा अनंत संभावनाओं से भरे करिश्माई व्यक्तित्व का आकलन करना एक कठिन कार्य है। अपने गुरुदेव अवेधनाथ जी महाराज एवं अपने दादा गुरु दिग्विजय नाथ जी को अपना आदर्श एवं प्रेरणास्रोत मानने वाले योगी आदित्यनाथ जी विलक्षण प्रतिभा के धनी है। आप हठयोग साधना की सैद्धांतिक, व्यवहारिक प्रक्रिया में पटू, भारतीय संस्कृति के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित है।
श्री योगी जी आध्यात्मिक उपलब्धि के साथ ही, भौतिक उपलब्धियों में भी कम नहीं हैं। आप 1998 में सबसे कम उम्र के सांसद सदस्य बनकर संसद भवन में पहुंचने वाले सांसद बने। आपने वहां भी अपनी छाप छोड़ी व वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री होते हुए स्वयं स्फुर्ती सेवा भावना, परदुख कातरता, कर्मठता व सूझ बूझ से इस कोरोना काल में भी उत्तर प्रदेश में अच्छे से संभाल रहे हैं। आप प्रशासनिक कार्यों में जितने सजग हैं, उतने ही लेखन में भी सजग रहे हैं। आपकी लिखी पुस्तकें हठयोग स्वरूप एवं राजयोग स्वरूप एवं साधना काफी लोकप्रिय है। गोरक्षनाथ पीठ में अखंड ज्योति, जो कि माना जाता है कि गोरखनाथ जी द्वारा प्रचलित की गई थी आज भी अनवरत जल रही है। साथ ही मंदिर परिसर में अखंड धुना, देव मूर्तियां, हनुमान मंदिर, भीमसेन मंदिर, भीम सरोवर, जल यंत्र, श्री गोरक्षनाथ संस्कृत-विद्यापीठ, आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं चिकित्सालय आदि गतिविधियां भी संचलित होती रहती हैं।